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डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्षी : हमारा अपना सुपरहीरो

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डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्षी : हमारा अपना सुपरहीरो

डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्षी : हमारा अपना सुपरहीरो

कल सुपर हीरो मूवी देखी, बॉडी बिल्डर सुपरहीरो नहीं, दिमाग वाला सुपरहीरो, ब्योमकेश बक्षी. ज़बरदस्त थी!

ईमानदारी से बोलूं तो जो व्योमकेश बक्षी बचपन में टीवी पर देखा था वो इस फिल्म से एकदम अलग था, ठंडा-ठंडा, कूल-कूल शांति से चलने वाले एपिसोड्स. पर अगर वही चीज़, आप दुबारा सिनेमा में फिर से देखो तो, फायदा क्या? नयी सोच और नये तिकडम के साथ नया डिटेक्टिव व्योमकेश, दिबाकर बनर्जी द्वारा बनायी गयी फिल्म माइंड गेम और सस्पेंस से भरपूर  है , देखने का मज़ा भी नया था. पूरा माहोल अंग्रेज़ो के ज़माने का, जब देश आज़ाद नहीं हुआ था, जापान अटैक करता रहता था. पूरा महौल create कर दिया art director ने. उस समय देश कैसा दिखता था, लोग कैसे रहते थे, गरीबी और आतंक के साये में.

ब्रेकिंग बैड की भी याद आई, पानी पिला दिया दिबाकर ने ब्रेकिंग बैड को. क्या एक से बढ़ कर एक टैलेंटेड डैरेक्टर्स हैं अपने पास. 135 मिनट की फिल्म में पलक झपकाने का मौका भी नहीं मिला. स्वस्तिका मुखर्जी बहुत ही खूबसूरत और attractive लगी, सुशांत सिंह राजपूत अच्छे लगे, थोडा और ठीक हो सकते थे, शायद पहले के ब्योमकेश बक्षी, रजित कपूर का हैंग ओवर होगा मेरे ऊपर. नीरज काबी ने बहुत ही बेहतरीन काम किया, ज़बरदस्त! बाकी लाइटिंग, एडिटिंग सब बहुत ही अच्छा था . मुझे फिल्म में आर्ट डाइरेक्टर का काम बहुत अच्छा लगा, पूरा समय तभी का, create कर दिया. अरे, मुझे तो फिल्म की हीरोइन से जलन भी होने लगी थी, क्या बात है, डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्षी जैसी फिल्म मैं काम करने का मौका मिलना सच में किस्मत और नसीब वालों की बात है!!!

अब कोई कहे की फिल्म थोडा हट के हैं, तो बात भी है!!!

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  1. 希望你的博客如这个夏天一样火热。

  2. honey,how are you

  3. You’re a really valuable website; couldn’t make it without ya!

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