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बढिया है ‘दम लगा कर हाइशा’

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Dum Laga Ke Haisha

Dum Laga Ke Haisha

प्यारी प्यारी मोटी मोटी महिलायें आज ” दम लगा कर हाइशा ” देखते समय खूब हंसती और मजे लेती दिखीं, आज किसी director ने दिमाग और दिल को शरीर से ज़्यादा
अहमियत देकर मोटे शरीर के अन्दर तडपते दिल को सांत्वना दी थी.

Movie बहुत अच्छी लगी मुझे, छोटी छोटी बातें जो घर के हर सदस्य को अपने महत्वपूर्ण होने का अहसास दिलाती हैं, जैसे मम्मी जी के birthday की पेस्ट्री, और पूजा की आरती के साथ साथ  पड़ोसियों में झगडे के बीच भी अच्छा  ताल-मेल , तमाम उहा- पोह और बड़ी परेशनियों में भी परिवार में प्यार, भाई और छोटी बहन का प्यार बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है, संजय मिश्र और शीबा चड्डा ने बहुत अच्छा काम किया! फोन पर अपने पति की गुजर जाने की खबर और अपने अपमान के दुखः, इन सब दृश्यों
 में  उन्होने बड़े ही मार्मिक ढंग से अभिनय किया, कि आँसू निकल आये. हमारे समाज में जाने  ऐसी कितनी मासूम लड़किया है जो  पति के नाम का बोझा ढोते ढोते कब बूढी हो जाती हैं, उन्हें भी पता नहीं चल पाता, सिर्फ एक आस में कि शायद   कभी वो  वापस बुला लेगा और अपनी पत्नी  होने का दर्ज़ा सम्मान के साथ देगा. दोनों परिवारों के कलाकारों ने किरदारों में जान डाल दी, नहीं तो आजकल तो फिल्मों में रिश्ते ऐसे दिखाते हैं जैसे घर में नहीं ऑफीस में हो, सब कुछ नपा तुला ।

पापा जी के जूते, हा हा,  आज भी याद आ अता है जब भाई को पडते थे, आज कल तो जूते सस्ते भी हो गए हैं, बेचारे लड़कों की तो खैर नहीं अब. और हाँ,examination hall में जब answer sheet अंशुमान के हाथ आई तो उसे देख कर आज भी दिल धडक गया, और कॉपी की खुशबू जैसे याद आ गई.  क्लास के लोग दूसरी answer sheet के लिये हाथ खडा करें उससे पहले ही हाथ खडा करने में जो आन्तरिक संतोष का अनुभव होना और दोस्तों का इशारे से पूछना की पहली कॉपी भर गई ? इतनी ज़ल्दी क्या लिख डाला? ये चीज़ भी  स्टायेल मारने में काफी मदद देती थी, पर  कभी कभार question paper देख कर जब आँखों के आगे अंधेरा छा जाता था, अंशुमान के हाल का अन्दाजा सहज ही हो जाता है….

फिल्म में आयुष्मान 10 वी फेल है, और फिर से 10 वी पास करने की ठानता है, बीवी को इंप्रेस करना है पर ऐसा नहीं होता कि इस बार वो कोई नयी पैयथागोरस प्रमेय ही लिख डालेगा , या भूमि पेडनेकर की कमर  40 से 26  हो जाएगी, किसी bollywood मसाला magic से, film ke writer ने कहानी बड़ी ही सच्चाई और संजीदगी से लिखी है.

सच्चाई भी यही की जो परिस्थति हो, वही से आगे बढना पड़ता है और परिस्थिति को बदलना पड़ता है

कई बार पति पत्नी के बीच बातों- बातों में हज़ारों ऐसे मौके आते हैं जब दिल को 100 टुकडों में टूटने में आधे मिनट का  समय भी नहीं लगता , पर प्यार भी ऐसी चीज़ है जो उसको जोड़  कर एक कदम और आगे बढकर मजबूत करने में आधे सेकेंड का टाइम भी नहीं लगाता, हाँ पर उसके लिये दिमागी तालमेल होना ज़रूरी है, फिर क्या मोटापा और क्या 32 -26 -34, कुछ भी मायने नहीं रखता, यही इस फिल्म की खूबसूरती है.

 शाखा प्रमुख, मौज़ूदा समय में एक दम सही लगे हैं, रुके हुए, पुरानी विचारधारा से युक्त, अपनी पहचान नये ज़माने पर थोपने में लगातार उत्सुक, कुछ कुछ नितिन गाडकरी जैसे लगे। उनका एक डाइलॉग बड़ा अच्छा लगा, एकदम सटीक, पर ठीक से याद नहीं है, लिखूंगी तो बिगड़ जायेगा, जा कर खुद देख लो।

आज कल हमारे नेताजी लोग Big Fat Wedding की कुरीति को सामाजिक प्रतिष्ठा का नाम देकर खूब फैला रहे हैं, वहीं फिल्म में बिना दहेज और सादगी से शादी करने का संदेश रोचकपूर्ण ढंग से दिया गया है. यशराज की ये एक अच्छी कोशिश है, फिल्म पूरी तरह से रोमांटिक , परिवारिक फिल्म है सभी लोग परिवार के साथ ये फिल्म देख सकते हैं, शरत कतरिया  की फिल्म अलग है और सराहनीय है , अवश्य देखें।

फिल्म की मुख्य कलाकार आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर ने बहुत मेहनत से किरदारों में जान फूक दी है, कुमार शानु और साधना सरगम के गानो ने पुराने रोमांटिक गानो की याद दिला दी , बोल वरुण ग्रोवर के है कुल मिलाकर अच्छी फिल्म है.  Do not miss it!!!

 – By  Kanika Mishra

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